विराट कोहली का नेतृत्व…

जब युद्ध होता है तब योद्धा तथा सेनापति की शक्ति का असली परीक्षण होता है। युद्ध में सबका अलग-अलग किरदार तथा जिम्मेदार होती है। जिसमे सभी अपनी पूर्ण निष्ठा एवं पराक्रम दिखाने की कोशिश करते है। युद्ध में सबसे अहम रोल सेनापति का होता है, सेनापति जरूरी नहीं कि सबसे अच्छा योद्धा हो पर उसमें योद्धा से भी कई अधिक गुण होने आवश्यक होते है।
सेनापति सेना की नींव होती है तथा उसमें नेतृत्व क्षमता, रणनीतिकार, साहसी, दृढ़ता, योजनाकार, तात्कालिक निर्णय की क्षमता, सामूहिकता, शालीनता, कठोरता, कार्य के प्रति समर्पित भाव, स्वामी के प्रति निष्ठा एवं संगर्षशील के गुण होने अत्यंत आवश्यक है। इन सभी गुणों वाले सेनापति कि सेना कभी परास्त नहीं होती है।
सेनापति योद्धा अच्छा तो या ताकतवर हो यह आवश्यक नहीं है।

महेंद्र सिंह धोनी

बाहुबली फ़िल्म में जैसा कि देख चुके है, भलालदेव व बाहुबली में ताकतवर ज्यादा भलालदेव था पर नेतृत्व के अभिक गुण बाहुबली में थे।
इतिहास में भी यही पढ़ने और सुनने को मिलता था कि जिसमें नेतृत्व की क्षमता अधिक होती है उसे ही नेतृत्व प्रदान किया जाता रहा है।

सौरव गांगुली

भारत की क्रिकेट टीम की बात करें तो पहले से एक परंपरा चली आ रही है कि जो टीम का सबसे अच्छा खिलाड़ी होगा नेतृत्व (कप्तान) उसे की प्रदान किया जाता है। जिसका परिणाम भी भारत की टीम कई वर्षों तक भुगत भी रही है। बार बार यह प्रयोग असफल भी हुआ है।
सचिन तेंदुलकर दुनिया का सबसे बेहतर क्रिकेटर था पर नेतृत्व में अक्षम था। सौरव गांगुली ने इसको जरूर सही साबित किया था।
महेंद्र सिंह धोनी की क्रिकेट जगत में एंट्री होते की तुरंत कप्तान बना दिया था वह बेहतरीन खिलाड़ी के साथ ही सबसे अच्छा नेतृत्व प्रदान करते हुए कई ट्रॉफियां भी जीती। भारत के क्रिकेट जगत का ढर्रा भी बदल दिया एवं नए नए खिलाड़ियों की खोज करके दुनिया की बेस्ट टीम छोड़कर क्रिकेट से दूर हो गए थे। यही प्रयोग विराट कोहली पर प्रयोग किया गया वास्तव में कोहली एक अच्छा खिलाड़ी है पर नेतृत्व करना उसके बस की बात नहीं रही है। जिसके परिणाम भारत पिछले कई सालों से भुगत रहा है। हर बात बात पर छिड़चिड़ा होना, चिल्लाना, फुदकना आदि नेतृत्व के लक्षण नहीं होते है। आखिर सबको समझ में आ ही गया है अब जा कर परिवर्तन किया है।

विराट कोहली

विराट कोहली पुरानी परंपराओं के तहत दीपावली पर प्रदूषण का ज्ञान देने आ पड़े ताकि भारत के लिबरल लोगों की सहानिभूति के कारण कप्तानी पर टिका रहे।
वास्तव में नेतृत्व क्षमता तो एक गॉड गिफ्ट होती है वह हर किसी में नहीं होती है, उसकी परख भी एक जौहरी ही कर सकता है।

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