उत्तर प्रदेश निर्णायक मोड़ पर खड़ा है…

विश्व में कुल 193 देश हैं।
यदि उत्तर प्रदेश को भी देश माना जाए तो वर्तमान में इसकी जनसंख्या 20 करोड़ है, दुनिया में केवल 5 देश, चीन, भारत, अमेरिका, इंडोनेशिया और ब्राजील ऐसे हैं जिनकी जनसंख्या इससे अधिक है, छठा स्थान यूपी का है।
यदि क्षेत्रफल की बात करें तो यूपी ग्रेट ब्रिटेन से भी बड़ा है, दुनिया के 113 देश क्षेत्रफल में और 188 देश जनसंख्या में यूपी से छोटे हैं।
उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री अर्थात 188 देशों के राष्ट्राध्यक्ष से भी बड़ा, भारी और चुनौतीपूर्ण पद है।
देश की सबसे समझदार जनता यूपी की है। सर्वाधिक तीर्थ, नदियां, उद्योग, उपजाऊ भूमि, वैविध्य, धर्म संस्थान और महापुरुष देने वाला है उत्तर प्रदेश।
लेकिन सच्चाई यह भी है कि यहाँ की अल्पसंख्यक कही जाने वाली आबादी सबसे घाघ, अराजक, आक्रामक और उत्पीड़क है। 1947 में भारत का विभाजन इन्होंने ही करवाया और स्वयं गये भी नहीं, यहीं जमे रहे।
अपने वोटबैंक की दादागिरी और सेक्युलर जमातों से ताकत प्राप्त कर इन्होंने विगत कई शतकों तक जमकर नंगा नाच किया, उत्पात मचाया और टुकड़ों में बंटे बहुसंख्यक समुदाय का जमकर शोषण किया।
दुर्भाग्य से आजादी बाद अधिकांश मुख्यमंत्री इन्हीं उत्पीड़क तत्त्वों से ब्लैकमेल होकर हिंदुओं पर अतिशय अत्याचार करते रहे, उन्हें भयंकर उपेक्षित रखा जिसकी प्रतिच्छाया पूरे देश के शासन प्रशासन में रही।

योगी आदित्यनाथ

स्वतंत्र भारत की दो ऐसी बड़ी घटनाएं हैं जो हिंदुओं को उनकी औकात दिखाने की प्रतिनिधि घटनाएं कही जा सकती है।
1.निहत्थे रामभक्तों पर गोली चलाना, यह यूपी में हुआ और हर कोई आज तक इससे अवाक है और परिणाम:- बाद में पुलिस प्रशासन के लिए ऐसा करना पूरे भारत की परंपरा ही बन गई।
2.जनता द्वारा चुने हुए लोकप्रिय मुख्यमंत्री को मारने की साजिश, इशरतजहां एनकाउंटर के बाद सम्बंधित अधिकारियों का केंद्र सरकार द्वारा भयंकर उत्पीड़न और उन्हें जेल में ठूंस देना, यह गुजरात में हुआ। परिणाम:- प्रशासनिक अधिकारियों ने हिंदुओं की सुरक्षा, संरक्षा के प्रति एक अजीब उदासी ओढ़ ली।
दोनों ही प्रदेशों के हिंदुओं की इच्छा आकांक्षा पुंजीभूत होकर अपने अभियान पर निकल चुकी है।
गुजरात ने अपना काम कर दिया, अब यूपी की बारी है।
गुजरात से जो व्यक्ति भारत को मिला उसने दुनिया भर में खलबली मचा दी, लोकप्रियता का रिकॉर्ड तोड़ दिया, वैश्विक नीतियों में उथल पुथल मच गई, संसार भर की व्यवस्थाएं नए सिरे से सोचने लगी है।
और, अब यूपी जो देने जा रहा है, वह उस खलबली व्यवस्था को नए सिरे से पुनर्स्थापित कर सम्पूर्ण विश्व को अद्भुत शांति, संतोष और सदाशयता के चिर युग में ले जाने वाला होगा।
यह समुद्रगुप्त और चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के  साम्राज्य के नैरन्तर्य जैसा है।
निश्चित ही भारत स्वर्णयुग की सीमा रेखा पर आकर खड़ा हो गया है।
देश के सामान्य मानव और हिंदुओं की अदृश्य इच्छाओं को देखने की यदि कोई मशीन होती तो जो सुनामी योगीजी के पक्ष में उमड़ रही है, विपक्ष इसमें कहीं…. कहीं…. कहीं… नहीं ठहरता।
पूरे विश्व की प्रकृति, देश की समग्र आध्यात्मिक चेतना, सभी महापुरुषों के दिव्य कर्म, सभी तीर्थों, सन्तों, गायों, सतियों, यतियों, योगियों, विभूतियों, कन्याओं और धर्मप्रेमियों के परमाणु निकल चुके हैं अपना काम करने।
कोई अंधा ही होगा जो इसे महसूस न कर पा रहा हो।
एक बार आंखें बंद कर दस मार्च के बाद के दृश्य की कल्पना तो कीजिए!!

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