दंगों पर सेक्युलर लेखकों का रण्डी रोना।

दंगों पर सेक्युलर लेखकों का रण्डी रोना।
वैसे ये सेक्युलर नहीं बल्कि मुस्लिमपरस्त और हिन्दू द्वेषी लोग हैं जो इधर उधर से चुग्गा मिलने पर मालिक के अनुकूल चहचहाते हैं।
देश में हो रहे साम्प्रदायिक दंगों पर इनके तर्क कुछ इस प्रकार है।

बचना आपको स्वयं को हैं, बचने के लिए मरने की सिद्धता चाहिए होती है।

बचा तो आपको पुलिस भी नहीं सकती। वह स्वयं दंगाइयों के हाथों पिट रही है।
मोदी, योगी को गरियाने वाले ध्यान दें कि आपके इन व्यंग्य वचनों से आहत होकर, कोई मोदी योगी, आपके घर आपको बचाने नहीं आने वाला।
इस देश के तीन प्रधानमंत्रियों की हत्याएं हो चुकी हैं, तो सुरक्षित तो वे भी नहीं है, आपको क्या बचा पाएंगे।
बचना आपको स्वयं को हैं। बचने के लिए मरने की सिद्धता चाहिए होती है।

आज शरण मांगी, कल हक मांगेंगे

दिल्ली में अफगानिस्तान से आये शरणार्थियों के बच्चे बहुत गुस्से से “वी वांट जस्टिस” के नारे लगा रहे हैं.

आपसी झगड़ा जिहाद की साजिश है

ये अपनी आक्रामकता, उपद्रव और हिंसा से आपको अपने इलाके से भगाकर ही दम लेंगे। इनके जिन्दगी का मूलमंत्र है।

लव जिहाद कितना बड़ा षड्यंत्र…

बच्चे सावधान!!जो मोबाइल रखते हैं और सोशल मीडिया पर सर्फ़ करते हैं।ये भारत की होनहार और उभरती कराटे प्लेयर पामेला अधिकारी थी। अब वो इस संसार में नहीं है। सिर्फ 14 साल की अबोध आयु में उसने आत्महत्या कर लिया। उसकी इसी अबोध उम्र में उसके साथ कुछ ऐसा घटित हुआ जिसकी कीमत उसे अपनी … Read more