किसान आंदोलन नहीं नौटंकी मण्डली है

आज भी देश में यदि किसानों की बात करते हुए अल्लाहू अकबर कहना पड़ता है, इसका मतलब है आंदोलनकारियों के पास किसानों को कहने/देने के लिए कुछ भी है नहीं, उनका आत्मविश्वास समाप्त हो चुका है और अब वे मुसलमानों से गुहार कर रहे हैं कि हम किसान आंदोलनकारी आपकी शरण में हैं और अब आप ही हमारी लाज बचा सकते हैं।
मुसलमानों! हमारे साथ आओ, हमारी ताकत बढ़ाओ।” ऐसी गुहार जब तब सेकुलर, वामपंथी, जातिवादी और देशतोड़क तत्त्व लगाते रहते हैं।
देश का मुसलमान शान्त रहना चाहता है तो भी ये आन्दोलनजीवी इन्हें शान्ति से बैठने नहीं देंगे।
5% के आसपास स्वार्थी हिन्दू जब तब मुसलमानों को इस बात की दावत देते रहते हैं कि आओ, देश के विरुद्ध लड़ें!!
कांग्रेस, वामपंथी, जातिवादी और देशतोड़क तत्त्व मुसलमानों को अपनी जागीर समझते हैं। वे सोचते हैं एकाध नारा बोलकर, बरगलाकर, तालिबान का समर्थन कर, मोदी योगी को गाली देकर भारतीय मुसलमानों को भरमाया जा सकता है।
आश्चर्यजनक रूप से मुसलमान अब इनके कहने में नहीं आते।
वे इन्हें नखदन्त विहीन चुके कारतूस मानते हैं।
योगेंद्र स्लिम टिकेट की हालत भी बहुत ही खराब हो चुकी।
विगत नौ माह से नौटंकी में भाग लेने वाले कलाकार थक चुके हैं।

आरम्भ में 5 स्टार जीवन जीते हुए जो प्रदर्शन शुरू हुआ था, अब तो इन्हें मजदूरी तक न मिल रही।
बड़े दुःखी है। सोच रहे हैं कोई दंगा वंगा ही हो जाये, एकाध लाठी चले तो जैसे तैसे घर लौट जाएं।
मोदी सरकार के विरुद्ध मुसलमानों का इस्तेमाल करने के लिए दुःखीप्राणी अब हताशा में अल्लाहू अकबर जैसे नारे लगा रहे हैं।
यह लगभग वैसा ही सौदा है “मेरी अस्मत ले लो पर मेरे दुश्मन को तबाह करो!”
अब ये तो अस्मत लेने वाले पर निर्भर है कि वह “अस्मत ले लेने के बाद” क्या करता है?
ज्यादा सम्भावना यही है कि वह अस्मत ले लेगा, बल्कि पूरी तरह से निचोड़ कर ले लेगा। अस्मत को इतना चूस लेगा कि बाद में वह अस्मत दूसरों को ऑफर करने लायक भी नहीं रहेगा।
दुनिया बदल रही है। हिन्दू बदल रहा है। खास बात यह है कि अब भारत का मुसलमान भी बदल रहा है। वह इस्तेमाल नहीं होना चाहता।
किसान आंदोलन वाली नौटंकी मण्डली के इतने बुरे दिन आएंगे, सोचा न था।

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