हिन्दू धर्म की चुनौतियाँ | अपनो से संघर्ष

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संघर्ष के दो स्तर हैं।
परायों को तो गिनना ही नहीं है, उनकी जड़ों में ऐसा मट्ठा डाला जा चुका है कि वे समय के साथ निस्तेज होते चले जायेंगे। मात्र कुछ वर्ष की देरी है। आश्चर्य यह है कि पराए तो समझ गए कि उनकी सांस पिंजड़े की जिस चिड़िया में अटकी थी उसकी गर्दन पर हाथ जकड़ा जा चुका है और कभी भी मरोड़ते ही खेल खत्म।
संघर्ष का दूसरा स्तर ही सबसे भयावह है, उसी को समझते हैं।
हिन्दू समाज की अगली लड़ाई परायों से नहीं अपनों से होगी। स्वयं को भगवा का प्रतिनिधि या धार्मिक समझने वाले वर्ग से होगी। सच कहूं तो मलाई खाने वाले सवर्ण वर्ग से होगी। पिछले काफी समय से इसके संकेत दिख रहे हैं।
जो अपने को बड़का समझते थे, उन भाई लोगों का ईगो हर्ट हुआ है, एक तेली कैसे हम पर राज कर रहा है?

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आज हिन्दू समाज की सबसे विश्वसनीय कोई जाति वर्ग है तो वह है ओबीसी समाज। यही वर्ग संख्या बल हो या धार्मिक प्रतिबद्धता, सर्वत्र सच्चे अच्छे वास्तविक हिंदुत्व का प्रतिनिधि है।
स्वयं को सवर्ण समझने वाले समुदाय में त्यागी तपस्वी लोग निश्चय ही ओबीसी से ज्यादा है लेकिन सवर्णों का नेतृत्व उनके हाथों में नहीं है। सवर्ण जातियां अब भी दम्भी, धूर्त, कुटिल और क्रूर लोगों की गिरफ्त में है। उन्होंने अपने दम्भ, छल और कपट को सुनहरे आवरणों से ढंक रखा है और मन से ये कभी नहीं चाहते कि एक नए भारत का अभ्युदय हो। ये लोग ही शत्रुओं के सहायक है, शेष अपनी जाति के लोगों को भड़काकर, डराकर रखते हैं और हिन्दू ऐक्य में बाधक बने हुए हैं।
हिन्दू समाज का यह उच्च वर्ग अभी अभी ऐसा नहीं हुआ है, यह सदियों पुरानी गाथा है। स्वामी विवेकानंद ने जलयान से अमरीका जाते समय इनको सम्बोधित करते हुए एक लेख लिखा था, उसमें वे इनकी तीव्र भर्त्सना करते हैं। “तुम लोग मर चुके हो, तुम्हारी लाश जितनी जल्दी सड़ जाएगी, उसकी खाद पर भारत बनेगा” – इतने कठोर शब्द कहे थे स्वामीजी ने।
“लेकिन तुम्हारी सड़ती लाश की अंगुलियों में कुछ बहुमूल्य रत्न जड़ित अंगूठियां हैं जिन्हें मैं उतारना चाहूंगा।”
“तुम्हारे कुत्ते बिल्ली रसमलाई खाते हैं लेकिन तुम्हें पास की झौपड़ी में भूख से बिलबिलाते अपने ही बन्धु नहीं दिखते, धिक्कार है!!”
दलित बंधुओं की आशंका निर्मूल नहीं है, इनके अंदरूनी मंसूबे अब भी वैसे ही हैं और आप ध्यान से देखें तो ये सभी छद्म सेक्यूलर दलों से जुड़े हुए हैं और मन ही मन बीजेपी, संघ, हिंदुत्व, नरेन्द्र मोदी और यहाँ तक कि देश से भी घृणा करते हैं।
यह भद्रलोक अब उधर की मलाई चुकने के बाद, भगवा चोला पहनकर इस पाले में बड़ी तेजी से शेखी बघारता घुस आया है। इसका केवल एक ही उद्देश्य है, बनता खेल बिगाड़ना। क्या तुम्हें दिख नहीं रहा? यह कई लुभावने नारों के साथ तुम्हारी बुद्धि कुंद करने निकला है।
स्वयं को सम्भालो हिंदुओं!!
सचेत हो जाओ। अगली लड़ाई अपनों से ही होगी और महाभारत बड़ी भयंकर होती है।

हिंदुत्व ko

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