आज शरण मांगी, कल हक मांगेंगे

दिल्ली में अफगानिस्तान से आये शरणार्थियों के बच्चे बहुत गुस्से से
“हमें न्याय दो” के नारे लगा कर भारत सरकार से मांग कर रहे हैं कि यदि उन्हें यहां स्थापित कर सुविधा न दी गई तो
अच्छा नहीं होगा!
वी आर स्पेशल
“थोड़ा दूर-दूर बैठो,”
“लम्बी लाइन लगाओ।”
“भारत में प्रदर्शन का यही सलीका हैं”
यह सीख दे रहे हैं, एनजीओ से जुड़े हुए जेएनयू और जामिया के सेक्युलर कीड़े।
यही लोग उनकी पैरवी भी कर रहे है ताकि इनकी एंटी-नेशन एजेंडे को ओर धार मिल सके।
भारत में पहले से ही जिहादी गैंग, टुकड़े-टुकड़े गैंग, अवार्ड वापसी गैंग, सबूत मांग गैंग, सेना विरोधी गैंग, चाइनीज गैंग व राष्ट्रद्रोही गैंग बहुत है, फिर यह लोग उस आग में घी डालने का कार्य करेंगे।
अफ़ग़ानिस्तानियों को अमेरिका से जाकर अपनी मांग करनी चाहिए जिन्होंने कई वर्षों तक उनको सुरक्षा की गारन्टी दे रखी थी।
मारने वाला मुसलमान, मरने वाला मुसलमान तथा उन आतंकियों का समर्थन करने वाले भी मुसलमान ही है।
जिन आतंकियों से भारत का चूहे-बिल्ली वाला रिश्ता है।

56 मुस्लिम देशों के होते हुए भी यह लोग भारत की और क्यों भागते है ?
कहीं यह भी तो एक जिहाद का हिस्सा तो नहीं है।
इनको लगता है कि हिंदुस्तान कोई धर्मशाला है, जिसमें हर किसी को पनाह देना का ठेका ले रखा है।
भारत में पहले से ही कौनसे आस्तीन के सांपो की कमी है जो कि इनको बसाना पड़ रहा है।
आखिर लिब्रिलिटी के चक्कर में कोई बड़ी गलती तो नहीं कर रहे हैं की बाद में पश्चाताप के सिवाय हाथ में कुछ नहीं रहे।
मांग तो ऐसे कर रहे है जैसे वे अपने दादा जी की जमीन से हिस्सेदारी मांग रहे है।
अभी तो शरण मांग रहे है बाद में यही मानव बंब बनकर भारत को नुकसान पहुंचाएंगे।
आज जब यह इतनी मुखरता से नाजायज मांग कर रहे है तो कल क्या करेगा जरा कल्पना कीजिये ?

Lalu Singh Sodha
[email protected]
www.lalusodha.com

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