मोदी के हटने के बाद कि योजना को समझिए…

1996 के विश्वकप की बात है।
हमारे कस्बे में क्रिकेट मैच देखने हेतु वहाँ के व्यापारियों ने बीच वाले चौक पर बड़े बड़े प्लाज्मा tv लगाए गए थे और लगभग पूरा कस्बा वहीं जमा हो जाता था।
एक मेले सा माहौल था।
फिर जब मैच शुरू होता तो प्रत्येक बॉल के साथ कई कई समीक्षाएं एक साथ निकलती।
जबरदस्त क्रेजी माहौल, और उन समीक्षाओं में ही यह तय कर दिया गया था कि विश्वकप तो भारत ही जीतेगा। क्वार्टर फाइनल तक जीत भी गया था।
सेमीफाइनल कोलकाता का ईडन गार्डन डे नाइट का मैच था शायद। भारत बनाम श्रीलंका
पूरे कस्बे को क्रिकेट का बुखार चढ़ा हुआ था।
पहले ही ओवर में तूफानी बल्लेबाज सनथ जयसूर्या और कालुवितर्ना के आउट होने के बाद हम बहुत ही उत्साहित थे लेकिन अरविंद डिसिल्वा और अर्जुन रणतुंगा ने पारी को संभाला और 252 का टारगेट दिया जो उन दिनों में अच्छा स्कोर गिना जाता था।
जवाब में भारत ने धीमी और सावधानी भरी शुरुआत की और सचिन तेंदुलकर ने 88 गेंदों में 65 रन बनाए थे। एक समय हम सचिन को धीमा खेलने और शॉट्स न लगाने के लिए कोस भी रहे थे। सचिन की हरेक बॉल के साथ  उसे गालियां पड़ रही थी। अधिकांश तो यह कहने लगे कि यह आउट हो जाये तो ही अच्छा।
और…. सचिन के 98 पर आउट होने के बाद पूरी टीम भरभरा के 120/8 के स्कोर पर पहुंच गई और दर्शकों का धीरज टूट गया। पब्लिक के हंगामे के बाद मैच श्रीलंका को जीता हुआ घोषित किया गया।
जब तक सचिन खेल रहा था, हम उसे धीमा खेलने के लिए कोस रहे थे। लेकिन उसके आउट होने के बाद पता चला कि पिच कितनी खराब हो चुकी थी और उस पिच पर खेलना कितना कठिन था।

नरेंद्र मोदी

कल ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर बोरिस जॉन्सन का जाना तय हो चुका है। एक सफल pm होने के बावजूद, पहले ही दिन से यहां का आदमखोर मीडिया उनके पीछे पड़ा था और एक एक करके उनके करीबियों को टारगेट कर रहा था और आज जापान के पूर्वराष्ट्राध्यक्ष की हत्या होना।
जब तक अमेरिका में व्हाइट हाउस में डेमोक्रेट्स बैठे हैं, किसी भी गैर वामपन्थी के लिए शासन करना बहुत कठिन होने वाला है। जो टिके हैं उन्हे ही पता है कि कैसे टिके हैं।
भारत में भी यही हालत है। हमें भी लगता है कि नरेंद्र मोदी खुल के शॉट्स नहीं मार रहे हैं, लेकिन टिके हैं यही बहुत है। शोर चाहे जितना मचा लें, मोदी को हटाने की सोचिएगा भी मत। मोदी अगर गए तो अनर्थ होगा।
आपको लग रहा है कि पेविलियन में बड़े बड़े धुरंधर पैडअप करके बैठे हैं। लेकिन पिच कितनी टर्न ले रही है यह वही जानता है जो पिच पर है। योगी जी और हेमन्त दादा अगर खुल के खेलते दिख रहे हैं तो वह इसलिए क्योंकि इंटरनेशनल प्रेशर को अब्जॉर्ब करने के लिए दूसरे छोर पर मोदी हैं। अगर मोदी हटे तो बाकियों का वही होगा जो ईडन गार्डन में सचिन के आउट होने पर पूरी इंडियन टीम का हुआ था। इसलिए स्टैंड से चाहे सिक्सर सिक्सर चिल्लाइए, बल्लेबाज को वापस बुलाने की गलती मत कीजिएगा। आज दुनिया की पिच गैर वामपंथी राजनीति के लिए बहुत ही खराब हो चुकी है। चौके छक्के भूल कर, सिर्फ टिके रहने की सोचिए।

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