राजस्थान में दलित की हत्या

राजस्थान में एक नोजवान युवक योगेश की पीट पीटकर हत्या कर दी गई, वह युवक दलित था पर कोई भी सेक्युलर गैंग चूं तक नहीं करेगा।
इसका कारण है कि 15 सितंबर को रसीद, साजेत पठान, मुबीना आदि शांतिप्रिय कौम के लोगों ने उसे मारा है।
बाइक पर जा रहे योगेश को अपने एरिये में रोक कर लाठी-डंडों से पीट पीटकर मार दिया गया।
मारपीट इतनी बेरहमी से की गई थी की उसे मॉब लिंचिंग के बाद 3 अस्पतालों में बदला गया पर जान नहीं बचा पाए।
इनकी चुपी के पीछे का कारण है कि वे हत्यारे एक समुदाय विशेष के है।
उदितराज जैसे दलित नेता से जब पूछा जाता है तो जवाब आता है कि उन्हें तो कोई जानकारी भी नहीं  है।
किसी के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकल रहा है जैसे मुंह पर ताला लग गया है।

दूसरी तरफ…
उधर इंदौर में मनचला युवक मेले में अपना नाम बदलकर चूड़ियां बेचने के बहाने महिलाओं और बालिकाओं से छेड़छाड़ करता है, वहां के कुछ लोगों ने थपड़ क्या मार दी राष्ट्रीय चैनलों पर दिनभर डिबेट चलने लगी।
पुलिस जांच में पता चला कि उसके पास 2-2 आधार कार्ड भी थे।
कोई पीछे नहीं छूट जाए इस बात की होड़ मची हुई थी।
वामपंथी व जिहादी मीडिया को तो जैसे मख्खियों को गुड़ मिल गया हो।
एक छेड़छाड़ करने वाले के पक्ष में राष्ट्रीय पार्टियों के नेता सुबह से शाम तक चैनलों पर रंडीरोना लगा रखा था।
निश्चित रूप से दोनो घटनाओं में दिन रात का अंतर है।
एक किसी गरीब युवक की जान चली गई जिसका कोई दोष भी नहीं था फिर भी उसकी पैरवी में जिहादी भांड, लिबरल नेता, व वामपंथी मीडिया के मुंह से एक शब्द नहीं निकलेगा।
दूसरी तरफ छेड़छाड़ करने वाले का विरोध करने की बजाय उल्टा उसको सही ठहराना और उसकी पैरवी में लग गए थे।
जहां गुनाहगार को एक थपड़ मारने पर नेशनल मीडिया प्रमुखता से बहस छेड़ देता है, तो हम समझ सकते है कि अभी भी तुष्टिकरण की राजनीति हावी है।
इन सबके पीछे ऐब बहुत बड़ा वामपंथी खेल चल रहा है जिसे समय रहते समझ लेना चाहिए वरना बहुत बड़ा नुकसान होगा।
खेर हमे तो पता ही था की यह कोई पहली बार नहीं हो रहा हैं।

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