सीमावर्ती क्षेत्र में तालिबानी

जैसलमेर में तालिबान नाम से क्रिकेट टीम रजिस्टर्ड भी हो गई, कमेंटेटर बड़े गर्व से बखान भी करता रहा, इंटरनेट पर उसका स्कोरबोर्ड भी डिस्प्ले हुआ और वह डाबला टीम, जिसमें ज्यादातर खिलाड़ी “तालिबानी” समुदाय से नहीं थे, जीत भी गई।
क्रिकेट प्रतियोगिता के आयोजक कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं। तालिबान टीम के खिलाड़ी ज्यादातर उन्हीं के रिश्तेदार हैं।
देश में जो भी तालिबान समर्थक आ रहे हैं, वे सभी कांग्रेस से जुड़े हुए हैं अथवा सेक्यूलर गैंग से है।

तालिबान टीम

राजस्थान में सरकार भी कांग्रेस की है, जिस मंत्री के रिश्तेदार इस प्रतियोगिता के आयोजक हैं वह भी कांग्रेसी है।
लेकिन राजस्थान सरकार की पुलिस चुप है या लीपापोती कर रही है।
इन पर कोई मुकदमा भी दर्ज नहीं हो रहा, यह खुलेआम तुष्टीकरण है।
जैसलमेर में तालिबानी मानसिकता बढ़ रही है। कांग्रेस पार्टी उसका संरक्षण कर रही है।
जहाँ जहाँ भी मुसलमान जनसंख्या बढ़ती है, तालिबानी मानसिकता भी बढ़ती हुई दिखती है।
इससे गैर मुस्लिम दहशत में हैं।
वे टीवी पर अफगानिस्तान की घटनाओं को देख रहे हैं।
उन्हें पता है कि यह मानसिकता बढ़ते हुए जब भी क्रियात्मक होती है, बहुत बड़ी तबाही लाती है।

तालिबान टीम का स्कोरशीट

कट्टर मानसिकता का दंश केवल गैर मुस्लिम ही नहीं झेलते?
अगर इतिहास देखें तो तालिबानियों ने सबसे ज्यादा मुस्लिमों को ही मारा है।
अभी भी वे जिन्हें मार रहे हैं या जिन महिलाओं बच्चों पर भयंकर अत्याचार कर रहे हैं वे भी मुस्लिम ही हैं।
लेकिन ये सभी मुस्लिम अपने ही कट्टरपंथियों पर अपने ही समुदाय पर हो रहे अत्याचार खुशी खुशी सहन कर रहे है और आश्चर्यजनक रूप से दुनिया में बदनाम हो चुके तालिबान शब्द का उपयोग हिंदुओं को चिढ़ाने के लिए कर रहा है।
मुस्लिम वर्ग का एक भी कदम ऐसा नहीं है जिससे भाईचारा बढ़े या उनका हिंदुओं से सौहार्द बढ़े।
वे जानबूझकर चिढ़ाने या उकसाने के कारनामे करते हैं।
कभी गौशालाओं में गायों को तड़पाकर मरवाते हैं कभी भड़काऊ नारे लगाते हैं।
और इसके बावजूद वे चाहते हैं कि कोई उन पर शक न करे?
यह कैसे सम्भव है?

Lalu Singh Sodha
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www.lalusodha.com

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