राजपूत बनना है तो बिपिन रावत बनो

राजपूत बनना है तो जनरल विपिन रावत बनो। क्या स्वैग था?

हर कोई रो रहा है।

कितना सम्मान दिया देश ने।

जिस प्रकार से जनरल रावत साहब को सम्मान मिला, पूरे देश ने उनके लिए आंसू बहाए, एक साधारण मोची से लेकर प्रधानमंत्री तक उदास, तड़पते, कलपते दिखे, संसार में इससे शानदार मृत्यु हो ही नहीं सकती। सड़कों पर महिलाएं दहाड़ें रो रही है, न जान न पहचान, पर पोस्ट पढ़ने वालों की आंखें भर आती हैं, चित्र देखकर कठोर हृदय भी सुबक रहे हैं, टीवी देखते हरेक व्यक्ति को लगता है भीतर से कुछ टूट गया है।

ये होती है असली राजपूती।

यह है क्षत्रियत्व!!

यह स्थान है तुम्हारे लिए हिन्दू समाज के ह्रदय में।

देश आज भी त्याग, बलिदान और उत्सर्ग को सर पर बिठाता है। क्षत्रिय के लिए सबसे गौरवशाली मृत्यु यही होती है जिसमें थोड़े से दुश्मन हँसें और बहुत सारे अपने रो पड़ें।

जी करता है एक नहीं दस बार जन्म लेकर बार बार ऐसी मृत्यु का वरण करूँ, यही मेरे लिए सर्वोच्च अभीष्ट लक्ष्य है, यही मेरे लिए मोक्ष है, यही मेरे अतीत गौरव रक्षण का एकमात्र मार्ग है, यही मेरे पूर्वजों का सच्चा तर्पण है, यही मेरी भावी संततियों के लिए सबसे शानदार सन्देश है। यही संसार में पूजे जाने और सम्मान प्राप्ति की कसौटी है।

हमारे पूर्वज भी यही सिखाकर गए है कि क्षत्रिय का सबसे बड़ा धर्म होता है कि अपने इसी जीवन में ऐसी अमित छाप छोड़कर जाना है कि शदियों तक याद किया जाए। अपने कौशल एवं व्यवहार से ही उसकी पहचन होती है। राष्ट्र सर्वोपरि होता है। समय समय पर जब भी राष्ट्र को जरूरत पड़ी है तो अपनी भूमिका भी प्रमुखता से निभाई है, यह क्षत्रिय कुल की परंपरा रही है। अपनी जननी को अमर कर जाए। सच्चा क्षत्रिय वही होता है जो अपने सिद्धांतों पर कायम रहता है।

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