योगी जी हमारे अपने है…

पिताजी पांच भाई थे ..!!
और सबसे छोटके चाचा अविवाहित थे ।।
और बताते हैं के गांव में एक महिला से वो अक्सर हंस बोल लेते थे ।।
एक बार की बात है के छोटके चाचा उसी महिला के यहां बैठे बतिया रहे थे के गांव में विपक्षी गुट वाले उन्हें घेर लिए ..!!
चाचा ने डर के मारे अंदर से कुंडी बंद कर ली ।।
और खिड़की से कहने लगे के मैंने कोई गलत काम नहीं किया है ।।
इतने में हमारे घर खबर पहुंची …!!
आनन फानन में मीटिंग शुरू हुई … कैसे स्थिति से निपटा जाय ।।
समस्या बेइज्जती की थी ।।
विपक्षी गुट वाले एक थप्पड़ भी मार देंगे तो इज्जत धूल में मिल जायेगी ।।
दादा ने स्थिति संभालने के लिए तीसरे नंबर के चाचा को जिम्मेदारी दी …!
वो पहलवान थे ।।
वो उक्त घर की तरफ बढ़े ।।।।
दरवाजे से आवाज लगाई राजे दरवाजा खोल …!!!
बड़े चाचा की आवाज सुन के छोटके चाचा ने दरवाजा खोल दिया ।।
सैकड़ो की भीड़ जमा थी ।।
दरवाजा खुलते ही बड़के चाचा ने छोटके चाचा को लात घूंसों पे ले लिया ।।।
और बाल पकड़ के घसीटते हुए घर को ले चले ।।
ये सब देख के विपक्षी गुट की हिम्मत न हुई चाचा को छूने भर की … और बड़े भाई के हाथों पिटने का कोई गम नहीं …कोई बेइज्जती नहीं ।।
घर का मामला घर मे ही रह गया ।।

Yogi Adityanath

Up के तमाम विप्र बंधुओ ।।
ये योगी बाबा भी अपने घर के ही  हैं ।।।
अगर इन्होंने कोई गलती की है तो खूब लानत मलामत करो …!
पर सोचो बाबा आज चक्रव्यूह में फंसा है ..!!
क्या हम उसे ..ओवैशी, मुख्तार, आजम और अतीक के हाथों पिटने के लिए छोड़ दें ।।
बाबा यदि कमजोर पड़ा तो हमारी आने वाली सात पुश्तें हमारे नाम पे थूकेंगी ।।
समय की मांग समझो … हमारा तू तू मैं मैं घर की बात है पर विपक्षी खेमा एक अंगुली भी टच कर देगा तो हमारी आत्मा खुद हमे माफ नहीं करेगी ।।
प्राण प्रण से कूद जाओ इस महासमर में ।।
जीत के बाद बाबा को तगड़ी खरी खोटी सुना लेंगे ।।।

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